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महिला सहभागिता
अनगिनत सामाजिक, सांस्कृतिक, स्वयंसेवी
संस्थाओं की तुलना में भारत विकास परिषद् में महिलाओं की भूमिका खास है जिसका
उदाहरण हैः 1. दम्पति सदस्यता 2. महिला सहभागिता का राष्ट्रीय प्रकल्प। रक्त की एक-दो बूंद से नये
शिशु को जन्म देने, तन-मन-धन न्यौछावर करने, स्वयं भूखे रहकर उसका पेट भरने,
शिक्षित व संस्कारित करने, बहिन-बेटी -पत्नी-बेटी के रूप में तप कर शिशु को समाज के
लिए प्रस्तुत करने वाली महिलाओं की सहभागिता को कार्यक्रमों, प्रकल्पों द्वारा बढ़ावा
देना आवश्यक है। प्राचीन इतिहास उठाकर देखें तो कोई भी अनुष्ठान बिना महिलाओं के
पूर्ण नहीं माना गया। भा.वि.प. में संगठन व्यवस्था, कार्यक्रम की परिकल्पना एवं
कार्यक्रम आयोजनों में भी सक्रिय भूमिका की अपेक्षा की गई है जिससे महिलाओं में
आत्मविश्वास की वृद्धि हो और उनकी क्षमताओं, कलाओं का लाभ मिल सके। साथ ही परिषद्
के प्रचार-प्रसार को और भी प्रभावी बनाया जा सके। इस संबंध में कुछ तरीके अपनाये जा
सकते हैं:
1. सदस्यता रसीद पर पति-पत्नी दोनों का नाम
लिखा जाये।
2. पति-पत्नी दोनों को साथ-साथ दायित्व ग्रहण कराया जाये।
3. बैठक में उपस्थित दम्पति का स्वागत हो तथा दम्पति की उपस्थिति हो ऐसा प्रयास करें।
4. उपस्थिति रजिस्टर पर पति-पत्नी दोनों के नाम अंकित हो।
5. निमंत्रण-पत्र, घर के पते पर, सर्कुलर पर भी दोनों का नाम अंकित हो।
6. शाखा, प्रान्त, जोन एवं केन्द्र स्तर पर महिला संयोजिका का मनोनयन अति आवश्यक है
तथा महिलाओं को उचित दायित्व भी दिया जाये।
7. शहर में कम से कम एक महिला उन्मुख शाखा अवश्य हो।
8. पत्नी को बैठक में
लानेवाले पुरुषों को सम्मान दिया जाये।
9. महिला सहभागिता के वार्षिक कार्यक्रम तय हों तथा सर्वत्र प्रेषित किये जाये।
10. महिलाओं की जन्मतिथि की बधाई दी जाये तथा अधिक से अधिक सदस्य बनायी जाये।
11. भारत विकास परिषद् का मुख्य उद्देश्य है भारत की संस्कृति का ज्ञान कराना तथा
युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से सजाना जिसके तहत महिलाओं के बीच
थाल-कलश-घड़ा-द्वार-फूल-रंगोली आदि की सज्जा
करायें।
12. मेंहन्दी-पोस्टर-शुभकामना संदेश लिखवाने की प्रतियोगिता करें।
13. नृत्य, गीत-भजन-लोकगीत अदि की प्रस्तुति करायी जायें।
14. धार्मिक एवं राष्ट्रीय पर्वों तथा परिषद् के स्थापना दिवस को महोत्सव का रूप
दें।
15. ग्रीष्मावकाश में बालक-बालिकाओं हेतु संस्कार शिविर लगायें।
16. प्रौढ़ शिक्षा अभियान चलायें, महिलाओं के लिए स्वास्थ्य मेला आयोजित हो तथा
कमजोर वर्ग की बालिकाओं, विधवा हेतु सिलाई-कढ़ाई केन्द्र चलायें एवं आत्म निर्भरता
के कोर्स कराये जाये।
17. समाज की ज्वलंत
समस्यायों पर गोष्ठी कर जन चेतना जगायें जैसे - पर्यावरण, जल ही
जीवन है, पोलीथीन पर रोकथाम आदि।
18. प्रत्येक बैठक में निम्न लिखित
महिलाओं को सम्मान दें - परिश्रमी विधवा महिला,
विशेष उपलब्धियाँ प्राप्त महिला, साहित्य -कला-शिक्षा क्षेत्र में ख्याति प्राप्त,
कन्या भ्रूण हत्या रोकने के कार्यक्रम आयोजित करने वाली, दहेज लेने वाले का सामाजिक
बहिष्कार करने के कार्य वाली महिला।
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