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                                                    Niti Editorials : 2017

January सम्पादकीय
February ...और इस तरह बीत गया 2016

March

भारतीय नववर्ष 2074 हमारा नववर्
April सम्पादकीय
May सम्पादकीय
June सम्पादकीय
July सम्पादकीय
August सम्पादकीय
September सम्पादकीय
   

 

January, 2017
सम्पादकीय
पछले मास बहुत सी औपचारिकताऐं करने के बाद मीडिया के एक चैनल पर देश हित के विरूद्ध समाचार देने के कारण एक दिन का प्रतिबन्ध लगाने की घोषणा हुई। ज्ञात जानकारी के अनुसार कारगिल के युद्ध के समय चैनल की पत्रकारिता के रहते सेना को नुकसान उठाना पड़ा था। कश्मीर घाटी में पत्थरबाजों का समर्थन और जे.एन.यू. प्रकरण पर देश विरोधी गतिविधियों का महिमा मण्डन भी इसी चैनल के खाते में है। प्रखर श्रीवास्तव जो इस चैनल के साथ काम कर रहे हैं। बताते हैं कि किस प्रकार ताज होटल पर मुम्बई में हुए आतंकी हमले में ग्राउण्ड को कवर कर रहे संवाददाता ने सूचित किया कि सुरक्षा बलों ने एक आतंकी को सुरक्षित बाहर जाने का रास्ते दे दिया। इस खबर को चैनल पर जारी किया जाए। सुरक्षाबलों के मनोबल को तोड़नेवाली ऐसी खबरे इस चैनल की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगाती है। चैनल पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ अभिव्यक्ति की आजादी, प्रेस की स्वतंत्रता की आवाज उठी। लेकिन सच्चाई से वाकिफ कुछ पत्रकारों की टिप्पणियाँ देखिए। राहुल सिंगला कहते है कि चैनल को पूरी तरह बन्द कर देना चाहिए। आलोक ने फेसबुक पर लिखा ‘पत्रकारिता पर काले धब्बे जैसा है एनडीटीवी’ सोशल मीडिया पर हजारों पोस्ट आये जिन्होंने प्रतिबन्ध को उचित ठहराया। व्यवसायी जसप्रीत सिंह ने लिखा कि चैनल को एक दिन बन्द करने की मैं कड़ी निन्दा करता हूँ। इस चैनल को सदैव के लिए बन्द कर देना चाहिए। ऐसे चैनलों पर तकनीकी अथवा आपराधिक-देश विरोधी मुद्दों के कारण प्रतिबन्ध अस्थायी उपाय है। उपाय है जनता का अंकुश। जनता को ही देश हित और देश विरोध की परिभाषा को समझना होगा।

देश में विमुद्रीकरण की घोषणा कुछ ऐसे अंदाज में हुई कि लोगों ने कहा कि संभलने का समय ही नहीं मिला। टीवी के नियमित दर्शकों ने बताया कि अचानक प्रधानमंत्री के उद्बोधन की सूचना देखकर ऐसा लगा कि पाकिस्तान से युद्ध की घोषणा होने को है। देशव्यापी अर्थव्यवस्था के बारे में अंतिम व्यक्ति को प्रभावित करने वाली घोषणा इतनी अचानक हुई कि काले धन के खिलाड़ी सकते में आ गये। जिसे जो रास्ता मिला काले को सफेद करने मे जुट गया। सरकार रोज समीक्षा करती, जनता के लिए सुविधाएँ जुटाती, जुगाड़ करने वालों के लिए कड़े प्रतिबन्ध लगाये गये। देश में नक्सलवाद ठंडा पड़ गया। कश्मीर घाटी में आतंकी गतिविधियाँ लगभग गायब है। हवाला कारोबारी सदमें में हैं। जनता के बल्ले बल्ले है। लोकतंत्र में सरकार के किसी कदम से 98% जनता खुश नहीं होती। इस घोषणा से शतप्रतिशत जनता खुश है। विरोधी दलों को सड़क पर विरोध करने का साहस चुक गया। इसलिए संसद में हंगामा कर स्थगित करने का नाटक कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने 50 दिन मांगे। जनता 100 दिन देने को तैयार हो गई। स्वतंत्रता के बाद यह ऐतिहासिक घटना है। इस घोषणा से देश में अच्छे दिनों के आसार बढ़े हैं। वर्ष 2017 दस्तक दे रहा है। नया सबेरा भारत का भाग्य बदलने को आतुर है। कवियों, साहित्यकारों, फिल्मकारों, प्रबन्धन विशेषज्ञों और आर्थिक मामलो के विशेषज्ञों ने जिन शब्दों में इस घोषण की प्रशंसा की है वह देश के भविष्य की सोच की संभावनाओं का प्रतीक है। देश में महिला सहभागिता के सम्मेलनों में बढ़ती उपस्थिति से यह आभास होता है कि महिलाओं की नेतृत्व क्षमता के विकास में परिषद् की कार्यशैली अनुकूल भी है और प्रभावी भी।

राष्ट्रीय अधिवेशन अजमेर, भारत को जानो की राष्ट्रीय प्रतियोगिता श्री गंगानगर में सम्पन्न हो गई। राष्ट्रीय युवा दिवस (12 जनवरी) लोहड़ी, मकर संक्रान्ति, पोंगल, खिचड़ी आदि पावन पर्व (14 जनवरी), सामाजिक समरसता का प्रतीक है। मतदाता दिवस (24 जनवरी), गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) शायद इस वर्ष राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का आगाज लेकर आयेगी। यह समय अति सक्रियता का समय है। देश के निर्माण में अपनी शक्ति भर सहयोग और समर्थन का समय है। देश के परिवर्तन के साक्षी बनने का हमें सौभाग्य मिला। इसका भरपूर उपयोग करें।
                                                                                                                                             - डॉ. सुरेश चन्द्र गुप्ता


February, 2017
...और इस तरह बीत गया 2016
परिषद् के नये संविधान के आधार पर रीजनल प्रारूप की स्वीकृति वर्ष 2016 में परिषद् की प्रगति का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा। विशाल भौगालिक क्षेत्र, क्षेत्रीय विभिन्नताएँ, कार्यपद्धति में भिन्नता होते हुए भी रीजनल कार्यकर्ताओं की टीम का निर्माण हुआ। कुछ प्रारंभिक कठिनाईयों के साथ परिषद् का कारवा आगे बढ़ चला। क्षेत्रीय कार्यशालाओं में अभूतपूर्व उत्साह रीजनल बैठकों में लक्ष्य निर्धारण और प्रवास के कारण कार्य में उत्साह रहा। परिणाम भी प्रकट हुए। महिला कार्यशालाओं में महिला भागीदारी की उत्साहपूर्ण उपस्थिति इस का प्रमाण है। इस बढ़ते कारवां के चारचांद लगे नवम्बर में पूना के राष्ट्रीय समूहगान के आयोजन में। नवम्बर में केन्द्रीय कार्यालय में मीडिया सेल की स्थापना हुई। प्रान्तीय स्तर तक सम्पर्क के अभाव से राष्ट्रीय अधिवेशन 2016 की नवम्बर तक के पंजीकरण 1800 पर रूक गये। नोट बंदी को एक कारण बताया गया। सघन प्रयास शुरू किये गये। रीजन और प्रान्त की टीमों से सीधे वार्ता हुई। मीडिया सेल ने पूरी ताकत झोक दी। अजमेर की टीम का लक्ष्य 2500 पूरा करने का था। इतने ईमेल, फेसबुक, वीडियो कॉल, आखिर प्रत्यक्ष सम्पर्क का असर दिखाई पड़ा। कुल पंजीकरण 3816 हो गये। अजमेर की टीम को शाबाशी। व्यवस्था की दृष्टि से लगभग 20-25 कार्यकर्ता अजमेर के बाहर से आकर भी काम में जुटे। परिषद् की यात्रा में यह परिवर्तन मील का पत्थर साबित होगा।

राजनैतिक परिदृश्य पर नवम्बर की नोट बंदी की घोषणा एक बड़ी घटना थी। पिछले दो वर्षों का सरकारी काम काज और प्रधानमंत्री जी की स्वीकार्यता को आम जनता ने हाथो हाथ लिया। नेता विरोध करने पर तुले रहे। जनता समर्थन देने पर तुली रहा। मीडिया कभी समर्थन और विरोध को दिखाकर अपनी गति से चलता रहा। निश्चय ही सरकार का यह कदम भारत के आर्थिक विकास की नई इवारत तो लिखेगा ही। अच्छे कार्यों के लिए सामान्य जन की सहनशीलता, असुविधाओं के प्रति उपेक्षा और सरकारी समर्थन की इवारत भी लिखेगा। लोकतंत्र का एक प्रमुख स्तम्भ है सशक्त विरोध पक्ष। मुद्दों का अभाव विरोध पक्ष को बेमानी कर गया। इसलिए सर्वोच्चन्यायालय को संसद के लगातार गतिरोध पर टिप्पणी करनी पड़ी। 2016 के समापन ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत जाग रहा है, खड़ा हो रहा है और संसार का नेतृत्व करने की क्षमता से सुसज्जित हो रहा है।

आइये 2016 को विदा करते समय 2017 की नई आशाओं, विश्वास के साथ जागृत नागरिक की भूमिका निभाने में जुट जाए।
                                                                                                                                                           - S.C. Gupta


March, 2017
भारतीय नववर्ष 2074 हमारा नववर्ष

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 28 मार्च, 2017 पिछले एक महीने में नव संवत्सर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर इतने लेख पढ़ने को मिले। ऐसा लगा मानो सारा देश नववर्ष के वैश्विक उपाख्यानों में भारतीय कैलेण्डर की ऐतिहासिकता और विश्वसनीयता का कायल हो गया। संसार में पारसी, यहूदी, ईसाई और इस्लाम धर्मों के नववर्ष प्रचलित है परन्तु इनकी काल गणना का आधार धार्मिक उपादान, ऐतिहासिक स्मरण अथवा सांस्कृतिक परिवेश की कुछ घटनाओं के कारण वे तर्क संगत नहीं है। जबकि कलि संवत, सृष्टि संवत, विक्रम संवत तथा भारत में नववर्ष पर मनाए जाने वाले पर्वों की एक सटीक और विश्वसनीय परम्परा है। अनेक पत्रिकाओं ने विश्व में नववर्ष की श्रृख्ला उनका आधार और पर्व के मनाने का विशेष उल्लेख किया। यह भारतीय मनीषा का वैशिष्टय है कि अपना नववर्ष तर्क संगत और मानवीय संस्कारों का उल्लासपूर्ण आयोजन माना जाता है। परन्तु एक प्रश्न कभी-कभी मन को द्रवित कर जाता है। हम श्रेष्ठ संस्कृति के प्रवर्तक, तर्क संगत आयोजनों के निर्माता, क्या हम अपनी विशेषताओं का जश्न उसी तरह मनाते है, उतना ही उत्साह प्रकट करते हैं जितना अपेक्षित है। कभी-कभी किसी त्यौहार को मनाते समय एक सर्द टिप्पणी आह बनकर निकलती है। अब अपने पर्वों में वह उत्साह, उमंग, सामूहिकता और आनन्द नहीं रहा। क्या हो गया। हम भी वहीं हैं, समाज भी वहीं है, तीज त्यौहार भी वहीं हैं आखिर उत्साह कहाँ चला गया। यह हमारे अन्दर है। उत्साह अन्तर्मन का विषय है। नव वर्ष के आयोजन से अन्तर्मन के इस उत्साह को सामूहिकता के साथ प्रकट करें तो हमारे पर्वों में जीवंतता आ जाएगी। इस अंक में नववर्ष मनाने की विधि तथा प्रसंग प्रकाशित किये गये हैं। नववर्ष मनाते समय यदि सुझावों का अनुपालन करेंगे तो नव संवत सार्थक होगा।

प्रौढ़ साधना शिविर के आयोजन फरवरी मार्च में क्षेत्रीय स्तर पर सम्पन्न हो रहे हैं। शिविर में भाग लेने वाले सदस्यों ने वर्ष भर परिषद् के सेवा कार्यों में क्या सहभागिता की इसका लेखा जोखा भी करना चाहिए। अगले वर्ष अपनी समीक्षा करने और नये प्रौढों को कार्य से जोड़ने का लक्ष्य रखें तभी हम सेवा निवृत्त बन्धुओं को सामाजिक कार्यों में लगा सकेंगे। यह प्रौढ़ साधना शिविर सामूहिक जीवन के अभ्यासों का एक मंच तो है ही, सामाजिक कार्यों में अपनी सक्रियता के संकल्प का समय भी है।

देश के कुछ राज्यों में चुनाव हो रहे हैं। ये चुनाव 2019 के चुनावों की दिशा को निर्धारित करेंगे। दल बदलने की आंधी सभी राजनैतिक दलों में चल रही है। कभी उपेक्षा के कारण, कभी जातीय समीकरण के कारण कभी संसाधनों के अभाव के कारण जिसे चुनावी दंगल में जोर आजमाइश का मौका नहीं मिला तो दल बदल लेना आम बात हो गई है। शराब, पैसों का खेल, नोट बन्दी के बाद सवालों के घेरे में कितनी शराब, कितने करोड़ रुपये चुनाव के इस मौसम में जब्त होंगे। यह देखना भी मजेदार होगा। लोकतंत्र में सीटों की संख्या अथवा गठबन्धन के कारण सरकार तो बनती है पर वह क्या प्रदेश की जनता के मन की सरकार होती है, यह नहीं कहा जा सकता। इस बीच एक अच्छी खबर यह है जनता और संस्थाओं ने अधिकतम मतदान करने के प्रति विश्वास प्रकट किया है। लोकतंत्र की सफलता का यह एक मापदंड है।


 
April 2017
सम्पादकीय

राजधानी में उच्च शिक्षा के एक और केन्द्र को निशाना बनाते वामपंथियों, धर्म निरपेक्ष घटकों और देशद्रोह को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर प्रश्रय देने का एक और प्रकरण सियासी हल्के में चर्चा का विषय रहा। जब देशद्रोह की धुंध देश और विदेश में भारत की छवि को धूमिल कर रही हो, जब विश्वविद्यालय की एक छात्रा अचानक ट्विटर पर अपने शहीद पिता की शहादत की जिम्मेदारी पाकिस्तान के बजाय युद्ध को बताने लगी हो, तो राष्ट्रभक्त युवाओं का रक्त उबाल न ले तो आश्चर्य की बात होगी। गुलमेहर के ट्विट पर कोई क्रिकेट खिलाड़ी, कोई फिल्म कलाकार, कोई लेखक, साहित्यकार जब प्रतिक्रिया देता है। देश का आम आदमी समाज को दो हिस्सों में बंटा हुआ पाता है। मजे की बात यह है कि उच्च शिक्षा के केन्द्रों के विषय विशेषज्ञ जब ऐसे घटकों में बंट जाते हैं तो देश की मनीषा, संस्कृति और संस्कार को बचाए रख पाने की मुहिम को गहरा धक्का लगता है।

बंगाल और केरल में अल्पसंख्यकों तथा साम्यवादियों द्वारा हिन्दू समाज पर हिंसक हमलों का विरोध प्रखर हो गया है। दुखद स्थिति यह है कि राष्ट्रीय मीडिया के लिए यह खबर एक निष्प्रयोज्य खबर है। इन हिंसक घटनाओं का प्रतिकार जाग्रत और सशक्त हिन्दू समाज ही कर सकता है। इन घटनाओं का निहितार्थ यह भी है कि केरल की साम्यवादी सरकार की जड़े उखड़ने के कगार पर है।

इस माह एक अच्छी खबर भी है। इसरो के वैज्ञानिकों ने 104 उपग्रह एक साथ अंतरिक्ष में भेजने का रिकार्ड बनाया। इस घटना से विश्व के वैज्ञानिक आश्चर्यचकित हैं। इन उपग्रहों में तीन भारत के हैं, शेष अमेरिका, इजरायल, कजाकिस्तान, नीदरलैंड और स्विटजरलैंड के हैं। इस अभियान से इसरो ने एक अरब रुपये कमाए। भारत की प्रक्षेपण तकनीक सबसे सस्ती होने के कारण अनेक देश अपना प्रक्षेपण भारत के द्वारा सम्पन्न कराते हैं। भारत प्रतिवर्ष 5 प्रक्षेपण अभियान की क्षमता रखता है जबकि चीन केवल 2 अभियान की क्षमता रखता है।

सूचना एवं तकनीक को विस्तार के साथ टी.वी. प्रसारण, नेट, फेसबुक, ट्विटर ब्लॉग, व्हाट्सअप्प, मोबाइल, वाई.फाई जैसी सुविधाएं उपग्रहों से संचालित होती है। अब कृषि, रक्षा, स्वास्थ्य, मौसम और आपदा प्रबन्धन के क्षेत्र में उपग्रहों का उपयोग किया जाता है। हमारे वैज्ञानिकों ने प्रतिकूल परिस्थितियों में जो उपलब्ध्यिाँ प्राप्त की है वे गर्व करने योग्य है। एक समय था जब उपग्रह प्रक्षेपण के लिए प्रयुक्त क्रायोजेनिक इंजन अमेरिका के दबाव में रूस ने भारत को देने से मना कर दिया था। तब हमारे वैज्ञानिकों ने देशी इंजन का निर्माण किया। हमारे वैज्ञानिको की यह सकारात्मकता रक्षा क्षेत्र में लगातार अनुसंधान से प्रकट हुई। स्पष्ट है कि भारत में मेधा की कमी नहीं है। आवश्यकता है अकादमिक समुदाय, सरकार और उद्यमिता की एकरूपता की।
  -डॉ. सुरेश चन्द्र गुप्ता, सम्पादक



May 2017
सम्पादकीय
भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में उत्तर प्रदेश के चुनाव कुछ आश्चर्यजनक निष्कर्षाें के साक्षी बने। चुनाव में मतदान के समय उम्मीदवार की जाति, पार्टी, नेतागिरी की क्षमता, घोषणा पत्र के साथ जनता में उनकी लोकप्रियता का मापदण्ड नहीं माना। उत्तर प्रदेश में जाति के मुद्दे नकार दिये गये, कमजोर नेताओं के समूहों से ताकतवर नेतृत्व नहीं पनपता, विकास अपने में कोई मुद्दा नहीं होता। आखिरकार सभी सरकारे कमोवेश विकास के काम तो करती है। समाज का स्वाभिमान, अस्तित्व का संकट, घुट-घुट कर मरने जैसी नियति सहनशक्ति की कुछ सीमा होती है। प्रत्यक्ष लड़ाई तो विकास के मुद्दे पर ही लड़ी जा रही थी। लेकिन हृदय की गहराईयों में कुछ प्रश्न चिन्ह खड़े थे अस्तित्व के लिए संघर्ष। इसीलिए तो जाति के बंधन, सम्प्रदाय के बंधन, ऊँच-नीच के बंधन सब बिखर गये। अब कोई पूछता है कि भारतीय जनता पार्टी ने मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया। तुष्टिकरण और जाति पर बड़बोलेपन का डिमडिम पीटने वाले समीक्षा करने की बात कर रहे हैं। आर्थिक विपन्न और गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों को नोट बंदी के कदम पर इतनी खुशी हुई कि कल्पना करना कठिन है। यह सिद्ध हो गया कि सरकार गरीबों के लिए काम कर रही है। राजनैतिक विश्लेषक इन निष्कर्षों को स्वीकारने के बजाए भाव प्रवाह के गहरे निहितार्थ निकाल कर अपनी निष्कर्ष क्षमता की पीठ थपथपएंगे। उत्तर प्रदेश नई संकल्प शक्ति के साथ, नई ऊर्जा के साथ समाज की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए आगे बढ़ेगा। विकास की योजनाओं को रोका नहीं जाएगा लेकिन नौकरशाही के तानाशाही अंदाज पर ब्रेक जरूर लगेगा।

मुस्लिम महिलाओं के साथ असमानता का व्यवहार, उन्हें तिरस्कृत और अपमानित जीवन के लिए मजबूर करना और शरिया के नाम पर महिलाओं के प्रति अल्पसंख्यकों का तानाशाही रवैया एक बार फिर चर्चा में आया। 16 वर्ष की प्रतिभाशाली छात्रा नाहिद अफरीन ने टी.वी.शो इण्डियन आयडोल में दूसरा गौरवपूर्ण स्थान पाया। संगीत को उसने अपनी भविष्य की मंजिल बनाने की कोशिश की तो एक साथ 46 फतवों ने उसके कदम रोक दिये। धमकियाँ दी गई। असम सरकार ने उसे पूरी सुरक्षा देने का आश्वासन दिया। अभी मुस्लिम महिलाओं को खुली हवा में सांस लेने का समय नहीं आया। या यों कहें इस्लाम के कट्टरपंथियों को मुस्लिम महिलाओं के वागी तेवरों की पहचान नहीं हो रही है।

परिषद् के नये संविधान के आधार पर एक साल का कार्यकाल सम्पन्न हुआ। नई शाखाओं के बैंक खाता खुलने के बारे में नये नियम, शाखा की वार्षिक संबद्धता, लक्ष्य निर्धारण, प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के प्रारूप आदि विषय देर ही सही सभी कार्य सुचारू रूप से सम्पन्न हुए। रीजनल कार्यशालाओं में प्रभावी प्रशिक्षण की कार्य योजना तैयार है। प्रकल्प समूहों का पुनर्निधारण हो रहा है। पहली बार प्रान्तीय टीम को दो वर्ष का कार्यकाल मिल रहा है। इसलिए रिपोर्टिंग, समाचार प्रेषण, शाखा विस्तार, मीडिया की सक्रियता, प्रान्त, रीजन ओर केन्द्र के संबंधों की जीवन्तता के प्रयास बेहतर होंगें, ऐसी अपेक्षा है। सभी प्रान्तों के वर्ष 2016-17 के ऑडिटेड आकउण्ट, आय व्यय वितरण, इटको सहित यथा शीघ्र केन्द्रीय कार्यालय में उपलब्ध कराये जाए। प्रशासनिक दृष्टि से क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण ने कुछ प्रान्तों में पुनर्सीमाकन के प्रस्ताव भी विचाराधीन है। केन्द्रीय नेतृत्व की सफलता बहुत कुछ प्रान्त और रीजन की सक्रिय कार्य प्रणाली से सुनिश्चित होती है। रक्तदान महाअभियान की स्वीकृति प्रदान कर केन्द्रीय नेतृत्व ने परिषद् को अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुँचाने में पहल की है। इस अभियान के द्वारा वर्ष में 1 लाख यूनिट रक्तदान तथा 5 लाख रक्तदाताओं का डाटा बैंक तैयार करने का लक्ष्य है। केन्द्र सरकार द्वारा देश के सभी सरकारी, गैरसरकारी रक्त बैंकों को परिषद् के इस अभियान में मेडिकल टीम प्रदान करने का अनुरोध किया गया। चिकित्सा जिलाधिकारी तथा भारत विकास परिषद् के समन्वय से अभियान सफल होगा। महाअभियान की विस्तृत जानकारी इस अंक में दी जा रही है। कृपया सहयोग बनाएं रखें।    
-   डॉ. सुरेश चन्द्र गुप्ता,

 

June, 2017
सम्पादकीय
गर्मी की तपस अपनी चरम सीमा पर है। परिषद् के कार्यकर्त्ताओं ने रीजनल कार्यशालाओं में अपनी उत्साहवर्धक भागीदारी से यह सिद्ध कर दिया कि मनोबल और संकल्प शक्ति के सामने ग्रीष्म की अधड़ और गुबार भरी आँधियाँ अप्रसांगिक हो जाती है। प्रकल्पों के राष्ट्रीय लक्ष्य का निर्धारण किया जा रहा है। परिषद् के गुणात्मक विकास और शाखा विहीन जिलों में परिषद् की मशाल पहुँचाना। इस वर्ष का संकल्प है।

इस वर्ष परिषद् ने मीडिया के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई। दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल पर भारत विकास परिषद् के प्रकल्पों, सेवा कार्यों पर पच्चीस मिनट का लाइव टेलीकास्ट 26 अप्रैल को सम्पन्न हुआ। परिषद् के मीडिया सेल ने देशभर के फेसबुक अकाउण्ट पर पूर्व सूचना देकर इस टेलीकास्ट को लाइव टेलीकास्ट में परिवर्तित कर दिया। देश के विभिन्न भागो से कार्यकर्त्ताओं, सदस्यों और अनुकूल सेवा भावी बन्धुओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सीताराम पारीक, राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री सुरेश जैन और डॉ. सुरेश चन्द्र गुप्ता, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (केन्द्रीय कार्यालय) एवं सम्पादक ‘नीति’ को कोटिशः बधाई दी।

नई दिल्ली में स्थित सेमिनार, प्रदर्शनी, व्यापारिक मेलों तथा वित्तीय प्रबन्धन नियामकों के प्रमुख स्थल प्रगति मैदान में पहली बार कारपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी ट्रेड फेयर 2017 में 4-6 मई तक लगभग 250 राष्ट्रीय व्यावसायिक कम्पनियों के स्टालों के मध्य परिषद् का आकर्षक स्टॉल चर्चा का विषय रहा। पूर्णतः व्यावसायिक विशेषज्ञता के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा दिल्ली के सभी प्रान्तों ने उत्साहपूर्वक उपस्थिति दर्ज कराई। प्रदर्शनी के राष्ट्रीय स्तर के स्टॉलों पर परिषद् के सेवा प्रकल्पों की जानकारी पीपीटी के माध्यम से, फोल्डर तथा बैनर के माध्यम से दी गई। इस कार्य के लिए अनुवर्ती प्रयासों की भी योजना विचाराधीन है। प्रदर्शनी के समापन पर 6 मई को राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सीताराम पारीक जी के द्वारा रक्तदान महाअभियान का लोगो (प्रतीक चिन्ह) लॉन्च किया गया। इस अवसर पर श्री अजय दत्ता, राष्ट्रीय महामंत्री, श्री ओम प्रकाश कानूनगो, राष्ट्रीय वित्तमंत्री, सुरेश जैन, राष्ट्रीय संगठन मंत्री ने सहभागिता की। पश्चिम उत्तर प्रदेश के दायित्वधारियों ने प्रचार, बैनर, सज्जा, डिजिटल डिस्प्ले आदि व्यवस्थाओं में सहयोग किया। महाअभियान की जागरूकता डॉक्यूमेंट्री तथा नुक्कड़ नाटक का नाट्य रूपान्तरण शाखाओं को यथाशीघ्र उपलब्ध कराया जाएगा। इस अवसर पर श्री गुरेन्दर, सीएसआर प्रभारी, प्रो. सलूजा, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष संस्कृत भारती ने इस अभियान को अपना आशीर्वाद प्रदान किया।

एक महत्वपूर्ण खबर मध्य रीजन से प्राप्त हुई। गत वर्ष राजस्थान मध्य प्रान्त ने अपनी समस्त शाखाओं में शाखा की रिपोर्ट ऑन लाइन प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की। मध्य रीजन की कार्यशाला (सवाई माधोपरु) में पूरे रीजन के लिए ऑन लाइन रिपोर्टिंग का प्रदर्शन किया गया। सभी प्रान्तों ने इस वर्ष से ऑन लाइन रिपोर्टिंग की व्यवस्था स्वीकार की। अन्य क्षेत्रों को भी सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया जा सकता है।

केन्द्रीय नेतृत्व को सेवा कार्यों एवं सरकारी योजनाओं में सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए च्डव् में चर्चा के लिए समय प्रदान किया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष, महामंत्री, संगठन मंत्री तथा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (केन्द्रीय कार्यालय) के प्रतिनिधि मंडल ने डॉ. जितेन्द्र सिंह प्रभारी मंत्री च्डव् से भेंट कर परिषद् के विस्तार, प्रकल्पों एवं लाभार्थियों के विषय में विस्तृत चर्चा की। श्री राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पारीक जी ने सरकार की स्वच्छता, स्वास्थ्य और प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा स्तर को सुधारने में परिषद् के सहयोग का आश्वासन दिया। रक्तदान महाभियान के प्रकल्प को माननीय मंत्री ने विशेष रूचि सेना एवं मेडिकल टीमों के तकनीकी सहयोग का आश्वासन दिया। केन्द्र सरकार के सहयोग से चण्डीगढ़ प्रशासन के द्वारा 3 एकड़ भूमि सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल के लिए स्वीकृत होने की सम्भावना है।   -सम्पादक

 

July 2017
सम्पादकीय
राष्ट्रवादी सरकार के तीन साल कब गुजर गये पता ही नहीं चला। इस काल में विदेशों में भारतीय छवि में जबरदस्त सुधार, वैश्विक धरातल पर भारत की मान्यता, भारतीय मूल के लोगों को गर्व करने लायक वातावरण, अप्रवासी भारतीयों की हर कठिनाई में सरकार का साथ, हमारे गौरव के विषय रहे। वैश्विक संस्थाओं में भारत की प्रभावी उपस्थिति, विश्व कल्याण की हमारी मान्यता की सर्व स्वीकार्यता तीन साल की उपलब्धियाँ हैं। जन सामान्य के लिए कल्याणकारी योजनाओं की एक लम्बी सूची है। नोट बंदीकरण, जी.डी.पी., बैंक ब्याज दर, जी.एस.टी. आदि अनेक विषय सरकार की सफलता के सूचक हैं।

कुछ सियासी विषय जैसे गौवंश की रक्षा, राम मंदिर निर्माण, कश्मीर के बारे में सरकार की नीति, आरक्षण आदि मुद्दों पर सरकार के सधे हुए कदम और प्रतिक्रियाएं, नेतृत्व की सफलता के उदाहरण हैं। सीमा पर सैनिकों का मनोबल और ऑपरेशन, आतंकवादियों के पस्त होते हौसले नागरिकों के लिए गर्व की विषय है। राजनैतिक विरोधी, गहरी हताशा में है खासतौर पर उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद। हताशा के इस वातावरण में वामपंथी दल राजनैतिक प्रतिशोध और अराजकता का वातावरण निर्माण करने में लगे है। केरल में राजनैतिक हत्याओं का दौर तथा पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी मुसलमानो के तुष्टिकरण के प्रयोग, राजनैतिक विरोधियों की प्रताड़ना के समाचार लगातार मिलते हैं। तात्कालिक रूप से किसानों की समस्याओं के निराकरण में देरी, कर्ज माफी के विषय पर ऊहापोह और राजनैतिक दलों की साजिश का परिणाम है, जून में चला किसानों का उग्र आन्दोलन।

उपरोक्त सभी प्रकरणों में मीडिया की भूमिका राष्टीयहितों के दृष्टिकोण से संदेह के घेरे में रही। मीडिया का उद्देश्य होता है। (1) घटित घटनाओं की जानकारी देना। (2) समाचारों की विश्लेषण करना। (3) मनोरंजन करना। दुर्भाग्य से राष्ट्रीय मीडिया अपने दर्शकों को निष्पक्ष समाचार और विश्लेषण देने में असफल रहा है। कश्मीर में होने वाली छोटी बड़ी घटनाओं पर मीडिया का दृष्टिकोण सदैव नकारात्मक रहा। मेजर गोगोई का प्रकरण हो अथवा आतंकवादियों से निपटने की कोई घटना हो। मानवाधिकारवादियों को बहस का एक बहाना मिल जाता है। बहरहाल! देश जिस गति से ऊँचाईयों को छू रहा है। समस्याओं की गहराई और दुष्परिणाम भी उसी गति से दृष्टिगत हो रहे हैं। जिस भारतीय सेना के जवानों और उसके पराक्रम पर जनता नाज करती है। राजनैतिक विदूषक उनकी तुलना जनरल डायर से करते हैं। वे देश की अखण्डता और संस्कृति की खिल्ली उड़ाने का ही काम करते हैं। काश ये कथित वामपंथी नेता अपने आकाओं के अद्यतन व्यवहार से कुछ सीख ले पाते। दुनिया की एक बड़ी ताकत बनने को वेचैन चीन ने देशहित के लिए अपने एक प्रदेश में बहुसंख्यक समुदाय के लोगों पर सद्दाम गद्दाफी, मोहम्मद जैसे नाम रखने और बुर्का, हिजाब, गोल टोपी पर पूरी पाबन्दी लगा दी। अन्तर्राष्ट्रीय मुस्लिम भाईचारा एक दिवा स्वप्न बन गया है। अनेक मुस्लिम देशों में तीन तलाक नहीं है, शरिया कानूनों की मान्यता नहीं है, इन्डोनेशिया जैसे इस्लामी देश राम को अपना पूर्वज मानते है, तो भी वे इस्लामी देश हैं। भारत में रहने वाले मुसलमान केवल हिन्दू और हिन्दुत्व के विरोध की ही राजनीति करते हैं। गौवंश की हत्या, गौ मांस भक्षण, तीन तलाक आधुनिक शिक्षा विषयों पर मुस्लिम समाज की जागरूकता शनैः शनैः सबका साथ, सबका विकास करेगी।

परिषद् का स्थापना दिवस (10 जुलाई) इस वर्ष हमारे लिए कुछ विशेष प्रयोजन लेकर आया है। रक्तदान केवल एक अभियान नहीं है। यह परिषद् के सामाजिक परिर्वतन के लक्ष्य एवं सामाजिक संवेदनशीलता का बड़ा माध्यम बनेगा। मीडिया की सक्रियता दूरदर्शन, फेसबुक, कारपोरेट जगत में परिषद् की दस्तक, डाक्यूमेन्ट्री, नुक्कड़ नाटक आदि के प्रचारात्मक साधन इस अभियान को अंतिम व्यक्ति का सहारा बनने में सहयोगी होंगें। यूट्यूब पर परिषद् के मिशन को आगे बढ़ाने के प्रयास विचाराधीन है। डॉ. सूरज प्रकाश जी ने जो सपना 1963 में देखा होगा उस सपने को पूरा करने का समय आ गया है। हम सौभाग्यशाली है कि हमें परिषद् के सेवा मार्ग के द्वारा समाज में परिवर्तन का सपना पूरा करने का सुअवसर प्राप्त हुआ है। इस स्वर्णिम अवसर पर लक्ष्य प्राप्ति के लिए पूरी ताकत से, पूरे समर्पण से, पूरी सक्रियता से जुट जाएं। यही पाथेय है। -सम्पादक


August 2017
सम्पादकीय
स्वतंत्रता दिवस एक बार फिर भारत के देश भक्त नागरिकों के लिए सौभाग्य और उत्साह के क्षण लेकर प्रस्तुत है। वैश्विक स्तर पर नये अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का आतिथेय और गरमजोशी से स्वागत अनके महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्त्ताक्षर होने से भारत की धाक बढ़ी। भारत का कोई प्रधानमंत्री पहली बार इजरायल यात्रा पर गया। इजरायल ने भारत को एक सच्चा दोस्त कहा। आतंकवाद से निपटने में इजराइल की रणनीति संसार में अजेय मानी जाती है। संसार में समुद्री पानी को पीने लायक बनाने वाले दो सयंत्रों में से एक इजरायल में है। कृषि, वैज्ञानिकी, रक्षा उपकरण, शिक्षा आदि में इजरायल का सहयोग प्राप्त होगा।

वैश्विक पर्दे पर ब्रिक्स सम्मेलन में भारत चीन के प्रतिनिधियों की बातचीत औपचारिक ही रही। डोकला में भारत सिक्किम और चीन की सीमा पर सैनिक हलचल चिन्ता का विषय है। लेकिन समुद्री क्षेत्र में भारत जापान और अमेरिका का सामूहिक युद्धाभ्यास हिन्द महासागर में अमेरिकी युद्धपातों की हलचल भारत के मजबूत पक्ष के प्रमाण है। भारत और चीन की नोक झोक 1962 ओर 2017 के भारत और चीन के शब्दवाण कब धरातल पर साकार रूप लेंगे, कहा नहीं जा सकता। उत्तर कोरिया के तानाशाह परमाणु युद्ध की धमकी दे रहे हैं।

इन वैश्विक झंझावतों में भारत को यदि मजबूत और निर्णायक भूमिका निभानी है तो एक वैश्विक राष्ट्रों से प्राप्त समर्थन हमारी मजबूती का आधार बनेगा। साथ ही भारत को एक बड़े बाजार के रूप में चीनी वस्तुओं के उपयोग पर भी नियंत्राण करना होगा। कश्मीर में आतंकवादियों को अन्तर्राष्ट्रीय फंडिंग रोक कर, बृहद सर्च आपरेशन, आपरेशन आल आउट ने कश्मीर से आतंकवाद समाप्त होने की दिशा में निर्णायक कदम उठा लिया है। केरल में हिंसा, किसानों का आन्दोलन कुछ धीमा हो रहा था तब तक बंगाल के वशीरहाट में हिंसा के तांडव ने ममता के मुस्लिम तुष्टीकरण ने, बंगाल में हिन्दुओं के अस्तित्व पर एक बार पिफर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। दार्जिलिंग का आन्दोलन बंगाल सरकार के गले की हड्डी बन गया है।

कहा नहीं जा सकता वैश्विक कूटनीति, राष्ट्रों के साम्राज्यवादी मनसूबों की आग कब एक विकराल रूप ले ले। समाधन यह है कि भारत सामरिक और आर्थिक दृष्टि से मजबूत है। देशभक्त नागरिक जब जैसा समय आयेगा देश के लिए भरपूर समर्पण करने को तैयार दिखाई पड़ेगे। सतर्क रहे, जागते रहे। आखिर मानव जाति कल्याण का तानाबाना बुनने का दायित्व भी ईश्वर ने भारत को ही दिया है।

स्वतंत्रता दिवस महान् योगी महर्षि अरविन्द का जन्म दिन भी है। वे अखण्ड भारत को भारत माता के रूप में मानते थे। उनके क्रांतिकारी जीवन के प्रसंगों को स्मरण करने का समय है। इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर कृष्ण जन्म अष्टमी का संयोग भी प्रस्तुत है। रक्तदान महाअभियान की आंधी ने परिषद् को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में सफलता पाई है। आप सबके प्रयत्नों का ही सामूहिक परिणाम है, यह सफलता के आयाम। यूट्यूब पर Blood Donation BVP की डाक्यूमेंट्री, www.bvpbloodhelpline.org पर रक्तदाताओं का पंजीकरण भी प्रारंभ हो चुका है। - सम्पादक


September 2017
सम्पादकीय
देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर 14वें राष्ट्रपति के रूप में महामहिम रामनाथ कोविन्द ने पद भार ग्रहण कर लिया। देश के 13वें उपराष्ट्रपति के रूप में मुप्पवरपु वेंकैया नायडू को निर्वाचित घोषित कर दिया गया। मीडिया की सुर्खियों में इस खबर को भिन्न रूप में प्रस्तुत किया। देश के चार प्रमुख पदों (राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष) पर संघ नेताओं का कब्जा। उद्देश्य यह रहा होगा कि आम जनता संघ विचार के बारे में प्रतिशोधात्मक होंगी। मीडिया की इस टिप्पणी को सर्वजन ने सहर्ष स्वीकार किया। अब देश सुरक्षित हाथों में है, यह आभास समाज को होने लगा है। विदेशी ताकतों से सख्ती से निपटने का समय भी आ गया है। चीनी शासकों को पहली बार अपनी लगातार दी जाने वाली धमकियों का कोई असर न होते देखने का संयोग मिल गया। पड़ोसी देश में न्याय व्यवस्था का प्रभाव देखने को मिला जब कोर्ट के आदेश पर कोई होहल्ला नहीं हुआ, शोर शराबा नहीं हुआ और पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़ कर घर वापस लौट गये। नीतीश कुमार के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में आने के बाद वर्ष 2019 अविजित होने में कोई संदेह नहीं रहा। वामपंथी सदमें में है। क्षेत्रीय दलों के प्रतिनिधि भाजपा में शामिल होने के लिए कतार में खड़े हैं।

एक बार फिर स्वतंत्रता दिवस पर लालकिलें से भारत के गौरवशाली अतीत और भारत के भविष्य का स्वर्णिम चित्र प्रस्तुत होगा। स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएँ।

स्थापना दिवस पर शुरू हुआ रक्तदान महाअभियान कुछ प्रान्तों ने उच्च प्राथमिकता पर लिया। अन्य प्रान्तों ने प्रतीक रक्तदान कराया। अनेक प्रान्तों ने शाखाओं तक इस अभियान की सूचना, पत्रक, कार्यविधि पहुँचाने में भी कोताही बरती। 30 जुलाई तक हुए रक्तदान की आख्या प्रस्तुत करने में संचार माध्यमों की भूमिका रही। मेल, व्हाॅट्सप्प ग्रुप के द्वारा त्वरित समाचार प्राप्त हुए। रक्षाबंधन सामाजिक समरसता और सामाजिक सौहार्द का पर्व है। तीज उत्सवों पर महिलाओं का उल्लास और उमंग प्रशंसनीय रही। देश के अनेक भागों में बाढ़ का कहर सामान्य जन जीवन को अस्त व्यस्त कर गया। प्रान्तों ने स्थानीय स्तर पर बाढ़ राहत के उपाय किये। बाढ़ पीडि़तों को राहत पहुँचाई। गुजरात में बाढ़ का प्रकोप कुछ अधिक विनाशकारी था। गुजरात के लिए सारे देश से सहायता राशि भेजी गई। मुख्यमंत्री श्री विजय रुपाणी ने परिषद् के व्यवस्थित राहत कार्यों का जायजा लिया और परिषद् के लगनशील कार्यकर्ताओं की प्रशंसा की।

5 सितम्बर को शिक्षक दिवस पर कर्मयोगी विद्वान और समाज के भविष्य का निर्माण करने वाले शिक्षकों के वन्दन और अभिनन्दन का दिन है। समाज की आपा धापी भरी जिन्दगी में यदि कुछ शिक्षक गुमनामी के अंधेरों में अपनी एकान्तिक निष्ठा से समाज के निर्माण में लगे हैं तो ऐसे शिक्षकों की खोज कर उनका अभिनन्दन करना चाहिए। प्राथमिक राजकीय शालाओं में भी ऐसे कुछ शिक्षक अवश्य मिलेंगे जो शिष्यों को गढ़ने के काम में लगे हैं।

11 सितम्बर स्वामी विवेकानन्द के शिकागो सम्मेलन में राष्ट्रीय जयघोष का दिन है। इसीदिन अमेरिका के शिकागो शहर में लगभग 5000 विदेशी प्रतिनिधियों के सम्मुख स्वामी जी ने भारत की सहृदयता, विनम्रता और बहुलता को एक सूत्र में पिरोकर भारतीय संस्कृति की अभिनव छटा सारे संसार में बिखेरी थी। शिकागो वक्तृता में उनको नौ दिनों में विभिन्न विषयों पर दिये गये भाषणों से यह स्पष्ट है भारतीय संस्कृति के बहुआयामी प्रभावों से मानव कल्याण की अवधारणा को कैसे शक्ति प्राप्त हुई। 14 सितम्बर राष्ट्रभाषा हिन्दी दिवस के रूप में सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं में एक प्रतीक यादगार के रूप में मनाने लायक दिवस रह गया है। कुछ साहित्यिक संस्थाएं, शिक्षण संस्थाएं, कुछ कवि और साहित्यकार हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने का गुणगान कर इतिश्री कर लेते हैं। हिन्दी हमारी जीवन शैली है, हिन्दी हमारा स्वभाव है। हिन्दी हमारी सोच है यह हम भारतवासियों के तन और मन में धारण करने योग्य अमूल्य निधि है। यह राष्ट्रवाद की जननी है। अपने जीवन में हिन्दी का आचरण और व्यवहार हमारे लिए अपेक्षित है।

महिला नेतृत्व का विकास संस्कृति सप्ताह का एक प्रमुख सूत्र है। इस मास प्रयत्न किये जाए कि अधिक संख्या में गैर सदस्य परिवारों की भागीदारी से संस्कृति सप्ताह के कार्यक्रमों का जनाधार बढ़े। अन्त में सभी प्रान्तीय महासचिवों द्वारा प्रथम प्रान्तीय आख्या 30 सितम्बर, 2017 तक प्रेषिक करने का समय भी है। कृपया तैयारी करें।
- सम्पादक


October 2017
सम्पादकीय
70 वर्ष पूर्व देश आजाद हुआ था। महात्मा गाँधी के भारत छोड़ो आन्दोलन को 75 वर्ष पूरे हुए। देश की आजादी का सारा श्रेय गाँधी, नेहरु परिवार को दिया जाता है। देश की आजादी की चर्चा हो, आजादी पर कोई बहस हो, कांग्रेस और नेहरु, गाँधी को श्रेय दिया जाना एक परम्परा सी बन गई। लेकिन इस वर्ष एक राष्ट्रीय चेनल ने स्वतंत्रता के लिए उन क्रान्तिकारियों को श्रेय दिया जो कांग्रेस से हताश थे। कांग्रेस को यह शिकायत रही कि प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर नेहरु का नाम नहीं लिया। वे भूल गये कि वर्षों तक आजादी का संघर्ष करने वाले सावरकर, श्याम जी कृष्ण वर्मा, सुभाष चन्द्र बोस, मदन लाल ढींगरा और क्रान्तिकारियों की एक लम्बी श्रंखला को कांग्रेस ने संदेह के घेरे में रखा।

कुछ दिन पूर्व मीडिया में एक समाचार आया केन्द्र सरकार शैक्षिक पाठ्यक्रम में से रवीन्द्र नाथ टैगोर का नाम हटाने की साजिश कर रही है। इन्डियन एक्सप्रेस की इस खबर पर कोई खण्डन नहीं आया। जब कि यह एक प्रायोजित खबर थी। ऐसी खबर डोकलाम के बारे में भी आई। कहा गया भूटान ने डोकलाम को चीन का हिस्सा मान लिया था। सावधान समाचार पत्र के पाठकों और टी.वी. के दर्शकों को गुलाम मानसिकता और प्रायोजित समाचारों से सतर्क रहना होगा।

लगातार हो रहे रेल हादसों से रेल मंत्रालय ने सब कुछ ठीक न होने की पुष्टि कर दी। देश भर में फैला रेल पटरियों का जाल, सुरक्षा के लिए लगे 7 लाख रेलवे कर्मचारी और तकनीकी प्रक्रियाओं के होते हुए भी मानव स्वभाव में राष्ट्रीय हितों के बजाए व्यक्तिगत अहम, दूसरों को अपमानित करने की वृत्ति जैसी ओछी हरकते बड़ी घटनाओं का कारण बनती है। कम से कम खतौली की रेल दुर्घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है। मोदी जी ने सही कहा कि जब तक देश का हर नागरिक देश और समाज के काम को अपना काम नहीं मानेगा केवल धनोपार्जन का एक साधन मानेगा तक तक ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना कठिन है।

देश के अनेक भागों में आई बाढ़ ने ग्रामीण जन जीवन को अस्त व्यस्त कर दिया। असम, बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और इसी कड़ी में मुम्बई में हुई अति वृष्टि से मानो जीवन ठहर सा गया। केन्द्रीय सहायता के लिए गुजरात, राजस्थान, बिहार असम और बंगाल में विभिन्न स्रोतो से सहायता भेजी गई। परिषद् ने अपनी शक्ति और सामथ्र्य के अनुसार बाढ़ पीड़ितों को सेवा और सहायता पहुँचाई।

अक्टूबर माह में भारत को जानो, समूहगान की प्रान्त स्तरीय प्रतियोगिताएँ सम्पन्न होंगी। प्रयत्न करें कि इन प्रतियोगिताओं में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, समाज सेवी, शिक्षाविद् भागीदारी करें। रीजनल स्तर पर ऐसी अतिथियों की सूची बनाई जाए तथा केन्द्र को प्रेषित की जाए। रीजनल स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों की पूर्व सूचना दूरदर्शन, आकाशवाणी के क्षेत्रीय केन्द्रों तथा प्रिन्ट मीडिया को अवश्य दी जाए।

इस माह में सारा समाज त्योहारों और पर्वों की मस्ती में हर्ष और उल्लास की अनुभूति करेगा। शरद पूर्णिमा पर पूर्ण चन्द्र से प्राप्त अमृतमयी खीर का प्रशाद भारतीय परिवारों में खासा महत्व रखता है। पति के स्वास्थ्य और लम्बी आयु की मान्यता नारी समाज के लिए ईश्वर का आशीर्वाद पाने हेतु कठिन तप का दिन है - करवा चैथ। धनतेरस, दीपावली, भाई दूज, विश्वकर्मा पूजा, छठ पूजा, वाल्मीकि जयन्ती, गाँधी और शास्त्री जी का जन्म दिन हमारे जीवन में सुख, सम्पदा, वैभव, सौहार्द और विवेक का स्फुरण करे। 2 अक्टूबर स्वच्छता दिवस के उपलक्ष पर ‘स्वच्छता’ विषय पर आधारित डाक्यूमेन्ट्री का लिंक है http://bvpindia.com/useful_html इसका प्रदर्शन कर स्वच्छता जागरूकता में सहयोग करें। - सम्पादक


November 2017
सम्पादकीय
अमेरिका में रहने वाले एक भारतीय युवक ने अपने पिता को पत्र लिखा। मैं भारत आना चाहता हूँ लेकिन व्यावसायिक जिम्मेदारी से यह कठिन है। समय का अभाव है। मैं अपनी मातृभूमि को नमन करना चाहता हूँ। लेकिन व्यस्तता के कारण यह सम्भव नहीं है। मुझे यह याद है कि बचपन में मेरी पढ़ाई के लिए आप बहुत चिन्तित रहते थे। मेरा राजा बेटा खूब पढ़े/ऊँची डिग्री प्राप्त करें। मेरी पढ़ाई के लिए आपने बहुत कष्ट झेले। अब आपका सपना पूरा हो गया। लेकिन समय का अभाव, व्यस्तता, आपकी सेवा न कर पाने का दुख, क्या इसका एक मात्र कारण मैं ही हूँ। काश आपने मुझे अपनी संस्कृति, शिष्टाचार से युक्त एक संस्कारी युवक बनाया होता तो मैं भी आपके पास रहकर आपकी सेवा कर पाता। यह एक प्रश्न चिन्ह है जिसका उत्तर इस पीढ़ी को खोजना होगा। अधिक समय नहीं बीता-आशा साहनी का कंकाल मुम्बई के एक फ्लैट में मिला। डेढ़ साल पहले उनकी मृत्यु हो गई थी। अमेरिका में बेटे को न फुरसत मिली, न फोन सम्पर्क हुआ। जब फ्लैट में आया तो जानकारी मिली। पड़ोस के लोगों को इस हादसे का पता ही नहीं चला। महानगरों में पनप रहा व्यक्तिवाद, संवादहीनता, औपचारिक शिष्टाचार का परिणाम है यह घटना। सिंहानियाँ परिवार के एक अरबपति दम्पत्ति के लड़के ने सारी सम्पत्ति हड़प ली। वृद्ध दम्पत्ति किराये का घर लेकर रहने को मजबूर है। भारत देश सुसंस्कृत एवं नैतिक जीवन मूल्यों की दुहाई देने वाले देश में एक बड़ा प्रश्न चिन्ह है। संसार को धर्म अध्यात्म का ज्ञान देने वाला देश किस दिशा में जा रहा हैं।

नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कन्याकुमारी से दिल्ली तक भारत यात्रा का आयोजन किया। 22 राज्यों और सैकड़ों नगरों का भ्रमण कर यात्रा दिल्ली पहुँची। उद्देश्य था बाल उत्पीड़न, यौन हिंसा, लैंगिक भेद भाव के खिलाफ जन जागरूकता अभियान। प्रयास तो प्रशंसनीय है। देश में अनेक संस्थाएँ संस्कारशाला, चरित्र निर्माण, जीवन मूल्यों का संरक्षण आदि प्रयास कर रही है। फिर भी इन घटनाओं में संख्यात्मक वृद्धि और कृत्यों की निर्दयता और निर्ममता से रूह कांप जाती है। कारणों का विश्लेषण करेंगे तो यौन स्वच्छन्दता से भरपूर दृश्यश्रव्य सामग्री, खुला अंग प्रदर्शन और मानव जीवन के प्रति हमारा दृष्टिकोण इसके मूल में है। समाधान क्या? अनेक विचारकों ने समय-समय पर अनेक विकल्प प्रस्तुत कियें। धर्म के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण, संस्कार युक्त शिक्षा, भारतीय दार्शनिकों द्वारा दिये गये मूल्यों की स्थापना। ये प्रयास भी समाज जीवन में क्रियान्वित हो रहे हैं। कहते हैं - पतन की कोई सीमा नहीं होती। सीमा समाप्त तब होती है जब नव जागरण का कोई पुरोधा सटीक समय पर सटीक विधि से आघात करता है। तभी नवोन्मेष होगा। इसके लिए एक पूर्व शर्त है- अपने प्रयत्नों को कई गुना गति से चालू रखे। सबेरा तो आयेगा ही।

नवम्बर का महीना प्रान्तीय और रीजनल आयोजनों का महीना है। शाखा स्तर पर कुछ सेवा कार्य तथा परिवार मिलन सम्पन्न होते हैं। शीतकाल के इन महीनों में बड़े काॅलेजों तथा संस्थाओं में शिविर लगाकर रक्तदान पंजीकरण के कार्य को पूरा करने में लग जाएं।

गुरु तेग बहादुर बलिदान भारतीय इतिहास में एक गौरवशाली स्वर्णिम पृष्ठ है। उनके पुत्र गुरु गोविन्द सिंह ने अपने पराक्रम से धर्म की रक्षा में अपने प्राणों का बलिदान किया। गुरु गोविन्द सिंह के चार पुत्रों में से दो पुत्र जोरावर सिंह और फतेह सिंह को सरहिन्द की दीवार में जिन्दा चुनवा दिया गया। दो पुत्र अजीत सिंह और जुझार सिंह चमकौर युद्ध (1704) में लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। गुरु गोविन्द सिंह के 350वें प्रकाशोत्सव पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ। - सम्पादक
 


December 2017
सम्पादकीय
फेसबुक ने समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर लोगों को सच और झूठ की खबरों की पहचान करने को कहा। दरअसल इन दिनों ऐसे भ्रामक और असत्य समाचारों की बाढ़ आ गई है। फेसबुक के उपयोगकर्ता ऐसी सनसनी खबरों को पढ़कर तुरन्त धारणा बना लेते हैं। सोचिए भ्रामक और असत्य खबरों को अपलोड करने का क्या उद्देश्य हो सकता है। यह उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो देश की छवि को खराब करना चाहते हैं, जो देश का साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाडना चाहते हैं, जो सैनिकों का मनोबल तोड़ना चाहते हैं, जो राजनेताओं की छवि बिगाड़ना चाहते हैं और जो सरकार की नीतियों पर सिद्धान्तहीन हमला करना चाहते हैं। वे प्रकारान्त से देश के दुश्मन ही हुए न। ये करने वाले कौन है यह बताना आवश्यक नहीं। लेकिन वानगी देखिये मुम्बई के लोकल रेलवे स्टेशन पर पुल गिरने से बड़ी दुर्घटना हुई। रेल मंत्री को पुल चैड़ा करने को लिखा था, मना कर दिया गया। बिना इस तथ्य की छानबीन किये कि पुल चैड़ा करने के लिए पैसा जारी कर दिया गया था। एक अखबार में किसी वीडियो के आधार पर खबर छपी कि भगदड़ में घायल महिला से छेड़छाड़ की गई। खबर वायरल की गई। वामपंथी मुख्यधरा मीडिया पर छापी गई। ब्रिटिश साइट पर भी खबर चली गई। सोचिए देश की क्या छवि बनी होगी। जांच हुई तो पता चला घायल महिला की जान बचाने की कोशिश का मामला था। मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ के नवरात्रि पर्व के धार्मिक कृत्यों पर खूब फब्तियाँ कसी गई। हिन्दू त्योहारों पर ही दुर्भावना पैदा करने का कुत्सित प्रयास होता है। मीडिया का एक वर्ग देश की अर्थव्यवस्था की नकारात्मक छवि बनाने में लगा है। लेकिन जब झूठे तथ्यों की पोल खुलती है तब खबर दबा दी जाती है। अतः छद्म दोषी मीडिया चेनलो से सावधान रहे। - सम्पादक


 

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