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Senior Citizens’ Camps - Praudh Sanskar Shivirs

 

प्रौढ़ साधना शिविर चित्तौड़गढ़, राजस्थान (19-20 मार्च, 2016)
देश भर से प्रौढ़ सदस्य परिवारों का प्रौढ़ साधना संगम गुलशन गार्डन चित्तौड़गढ़ के प्रेक्षाग्रह में 400 सदस्य परिवारों के साथ सम्पन्न हुआ। श्री कैलाश चन्द्र मेघवाल, विधान सभा अध्यक्ष, राजस्थान ने उद्घाटन करते हुए देश की पहचान, अस्मिता और संविधान में घोषित मान्यताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि 68 वर्षों में भारत के सभी धर्मों, पंथों और जातियों के लोगों को आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक न्याय की गारन्टी देने में सफल नहीं हुए। इतने वर्षों में देश की आशादी में सिद्धान्तों की राजनीति तिरोहित हो गई। जातिवाद की राजनीति, भष्टाचार, नैतिक चरित्र का अभाव के कारण देश की दिशा बदल गई। देश की वर्तमान को बदलने के लिए प्रौढ़ वर्ग का एक महती भूमिका निभानी होगी।

इस अवसर पर सी.पी. जोशी, सांसद, श्री चन्द्रभान सिंह, विधायक तथा गणमान्य लोग उपस्थित रहे। मुम्बई से पधारे विद्वान, कथाकार श्री वीरेन्द्र याज्ञनिक ने स्वामी विवेकानन्द के अनछुए पहलुओं का उल्लेख करते हुए उनके अल्मोड़ा प्रवास की घटनाओ का जिक्र करते हुए बताया कि स्वामी जी की 150वीं जयन्ती वर्ष में जब वे शिकागो के उस सभागार को देखने गये जो वर्तमान में विवेकानन्द के अभिलेखागार के रूप में सुरक्षित है। उनके मित्र ने संग्राहलय अािध्कारी से उस स्थान को देखने की अनुमति माँगी। संग्राहलय के वह अधिकारी मेरे चरण स्पर्श कर उस स्थान पर ले जाता है। यह था स्वामी जी का प्रताप जिसके कारण स्वामी जी के साधरण शिष्यों को भी वही सम्मान प्राप्त है।

साधवी शमणी प्रज्ञा जी ने अगले सत्र में अणुवृत्त आचार्य तुलसी का जिक्र करते हुए 12 नियमों के बारे में बताया जिससे मनुष्य निर्माण का लक्ष्य पूरा होगा। आत्मा के गुण सीखो, काम, क्रोध, माया लोभ समाप्त कर वर्तमान में जीना सीखो। स्पअम पे चतमेमदज का भाव रखकर किसी से बुरा व्यवहार न करो। भावक क्रिया का उल्लेख करते हुए साधवी ने कहा कि जानकर करो अनजान बन कर मत करो। बोलने से पहले सोचो। क्या यह सत्य है? क्या यह सहयोग पूर्ण है? क्या यह उत्साहवर्धक है? क्या यह आवश्यक है? क्या यह ज्ञानवर्धक है?

शिविर के समस्त प्रतिभागी क्रमशः परिषद् के सदस्य, पदाधिकारी और महिला समूहों में खुली चर्चा के लिए अलग-अलग विमर्श के लिए एकत्र हुए। सत्रों का सार श्री सुरेन्द्र कुमार वधवा, ऋषभ खुराना, जयराज आचार्य ने प्रस्तुत किये। विद्यार्थियों को परामर्श, युवा दम्पतियों को समाधान, कारक व्यवस्था, स्वच्छता, गरीबो की सेवा, एकल और संयुक्त परिवारों का महत्व, संस्कार केन्द्र, विकलांग सहायता के साथ कई महिला प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किये।

सायंकालीन सत्र में दिल्ली के कुटुम्ब प्रबोध्न प्रमुख भगवानदास जी ने परिवारों में संस्कार व्यवस्था के लिए आधुनिक जीवन शैली के आधार पर करणीय व्यवहार का उल्लेख किया। रात्रि में मो. जब्बार पूर्व अध्यक्ष भारत विकास परिषद्, अब्दुल सत्तार तथा ख्यातानामा कवियों की उपस्थिति में रोचक काव्य संध्या के पूर्व सदस्य परिवारों द्वारा नृत्य, स्वागतगीत, होली गीत प्रस्तुत किये गये।

दूसरे दिन माननीय कैलाश जी क्षेत्रीय बौद्धिक प्रमुख, पी.के.जैन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का उद्बोधन हुआ। यह इसी अंक में अन्यत्र प्रकाशित किया जा रहा है। समापन सत्र में पुलिस अधीक्षक तथा विधायक श्री कृपाल जी सहित गणमान्य लोग उपस्थित रहे। श्री कमल जैन, प्रान्तीय महासचिव के निर्देशन में श्री अनिल ईनाणी, अध्यक्ष की टीम ने व्यवस्थाओं को भलीभाँति निर्वहन किया। विभिन्न समितियों के प्रभारी श्री ऋषभ खुराना, दौलत ढ़ासानी, डाॅ. चेतन खिमसेरा, आई.एस.सेठिया, डाॅ. महेश सनाढ़य, रमेश ईनाणी, बालकृष्ण धूत, कैलाश न्याती, कृष्ण गोपाल पुगंलिया, दिनेश कुमार खत्री, अम्बालाल काबरा के साथ सदस्यों ने सभी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से सम्पन्न किया। दोपहर भोज के बाद सभी प्रतिनिधियों को चित्तौड़गढ़ किले सहित सभी पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया गया।

 
 
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