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विकलांग सहायता की आवश्यकता
वर्ष 2001 में की जनगणना के अनुसार भारतवर्ष में 2.19 करोड़ विकलांग व्यक्ति मौजूद
हैं जो कुल जनसंख्या का 2% से भी अधिक है। यद्यपि यह संख्या विश्व बैंक एवं विश्व
स्वास्थ्य संगठन के अनुमानों से कम है जिनका कहना है कि संसार के समस्त अविकसित देशों
में विकलांगों की संस्था 10.2% के लगभग है।
इन कुल विकलांग लोगों की संख्या का 27.87 प्रतिशत ऐसे व्यक्तियों का है जो अंग
संचालन में असमर्थ है या उन्हें कठिनाई होती है। ऐसा भी अनुमान है कि प्रतिवर्ष
40,000 व्यक्ति विभिन्न कारणों से अपंग हो जाते हैं।
इस समस्या की विशालता को दृष्टि में रखकर भारत विकास परिषद् ने 1990 में विकलांग
सहायता एवं पुनर्वास योजना प्रारम्भ की एवं इसे राष्ट्रीय प्रकल्प का दर्जा दिया।
इस समय इसके 13 केन्द्र हैं जो विकलांगों को कृत्रिम अंग एवं अन्य उपकरण उपलब्ध
कराते हैं।
कृत्रिम अंगों का निर्माण
हमारे केन्द्र कृत्रिम अंगों एवं उसके भागों का निर्माण
करने हेतु आधुनिकतम यंत्रों से लैस हैं। वहाँ काम करने वाले प्रशिक्षित
टैक्निशियनों ने इन अंगों में निरन्तर सुधार करके इन्हें अत्यन्त हल्का एवं सुविधाजनक बना दिया
है। ये अंग विकलांग व्यक्तियों को अत्यन्त शीघ्रता से लगाये जा सकते हैं जो देखने
में सुन्दर लगते है एवं उनके सहारे व्यक्ति असली अंगों की भाँति बैठने, दौड़ने, चलने,
तैरने, साइकिल एवं कार चलाने के समस्त कार्य कर सकता है। इनकी सहायता से विकलांग
व्यक्ति भारी वजन भी उठा सकता है एवं वर्कशॉप तथा खेतों में काम कर सकता है।
पुनर्वास - एक महती आवश्यकता
इस समस्या का एक महत्वपूर्ण पहलू विकलांग व्यक्ति का
सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास है। विकलांग को कृत्रिम अंग दे देना ही काफी नहीं है।
इसलिए परिषद् ने विकलांगों के स्वरोजगार की एक योजना भी प्रारम्भ की है। इस योजना
के पीछे प्रभावित व्यक्तियों में आत्म-सम्मान
का भाव पैदा करना एवं उन्हें सम्मानजनक
ढंग से जीविकोपार्जन के योग बनाना है।
देश के कई भागों में अनेक ऐसे केन्द्र खोले गये हैं जो विकलांगों
के पुनर्वास हेतु
सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं ताकि वे लोग एक आत्मनिर्भर जीवन जी सकें। इन
केन्द्रों में विकलांगों को रोजगारपरक प्रशिक्षण जैसे कम्प्यूटर पर काम करना, सिलाई,
कपड़ों की छपाई, जिल्दसाजी, मोमबत्ती, चाक, डस्टर इत्यादि का निर्माण एवं अन्य इसी
प्रकार की कारीगरी सिखाई जाती है। कार्यालयों, कम्पनियों इत्यादि में इन्हें रोजगार
दिलाने का भी प्रयास किया जाता है। ये केन्द्र विकलांगों के विवाहों का भी आयोजन
करते हैं।
भारत विकास परिषद् ही एक ऐसी गैर सरकारी संस्था है जो प्रत्येक वर्ष अधिकतम विकलांगों
की सहायता करती है। 1990 में दिल्ली में प्रथम विकलांग केन्द्र स्थापित हुआ था एवं
तब से वह निरन्तर इस दिशा में सक्रिय है। प्रत्येक वर्ष परिषद् के केन्द्रों एवं
शाखाओं द्वारा 2 करोड़ 80 लाख मूल्य के लगभग 24,000 उपकरण विकलांगों को प्रदान किये
जाते हैं।
हमारे दो विकलांग केन्द्रों को राष्ट्रति पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। वर्ष 1995
में दिल्ली भारत विकास फाउण्डेशन को तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति ने उत्कृष्ट कार्य
के लिए इसे राष्ट्रीय पुरस्कार दिया था। वर्ष 2004 में लुधियाना केन्द्र को भी इसी
प्रकार महामहिम राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत किया गया। लुधियाना केन्द्र को वर्ष 2007 में प्रधनमंत्री द्वारा विकलांगों के पुनर्वास में
श्रेष्ठ कार्य करने के लिए फिक्की पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
भावी योजनाएं
हम एक विकलांग मुक्त ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जिसमें ये लोग
सामाजिक तथा राष्ट्रीय जीवन की मुख्य धारा से पूर्ण रूप से जुड़े होंगे। इस उद्देश्य
को प्राप्त करने के लिए भविष्य में कृत्रिम अंग तथा उपकरण प्रदान करने के अतिरिक्त
हमारा जोर उन्हें
आर्थिक रूप से समर्थ बनाने तथा समाज में सम्मानपूर्ण स्थान दिलाने
पर रहेगा।
दान
आप निम्न प्रकार दान देकर एक विकलोंग व्यक्ति को नया जीवन प्रदान कर सकते हैं
:
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एक कृत्रिम पैर के लिए - रुपये 750/-
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एक कृत्रिम बाँह (हाथ) के लिए - रुपये 1500/-
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एक कैलिपर के लिए - रुपये 750/-
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एक श्रवण यंत्र के लिए - रुपये 1000/-
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एक ट्राईसिकल (आई.एस.आई.मार्क) के लिए - रुपये 5500/-
भारत विकास परिषद् को दान की गई राशि आय कर अधिनियम की धारा 80 जी में कर मुक्त है।
चैक/ड्राफ्ट ``भारत विकास परिषद्´´ के नाम में बने होने चाहिए तथा वे दिल्ली में
भुगतान योग्य होने चाहिएं उनको निम्न पते पर भेजें :-
भारत विकास परिषद्
भारत विकास भवन, बी.डी.ब्लॉक, पावर हाउस के पीछे, पीतमपुरा, दिल्ली - 110034
दूरभाष 011-27313051, 27316049, फैक्स - 011-27314515
ई मेल - bvp@bvpindia.com
परिषद् के विकलांग सहायता एवं पुनर्वास केन्द्र
1.
अहमदाबाद- भारत विकास परिषद् विकलांग केन्द्र (पालदी सेवा ट्रस्ट) जगदीप टावर
बेसमेन्ट नजदीक थ्रीपास रेलवे क्रासिंग, वसरा पालदी, अहमदाबाद-387007 (गुजरात)
फोन-079-26636087, 26622257
2. दिल्ली- विकलांग सहायता केन्द्र (दिल्ली, भारत विकास फाउण्डेशन) राधा कृष्ण
मंदिर, नजदीक डी.टी.सी. बस स्टैण्ड, दिलाशद गार्डन, दिल्ली-110095, फोन
011-225963817, 22120559
3. गुवाहाटी- भारत विकास परिषद् विकलांग सहायता केन्द्र, 4, सती राधिका शान्ति रोड,
उजान बाजार, गुवाहाटी-781001 (असम)
4. हिसार- विकलांग पुनर्वास केन्द्र, हरियाणा भारत विकास फाउण्डेश, न्यू ऋषि नगर,
नजदीक बस स्टैण्ड, हिसार-125001 (हरियाणा) फोन 01662-230425
5. हैदराबाद- भारत विकास परिषद्, विकलांग पुनर्वास केन्द्र, डॉ. सूरज प्रकास सदन,
3-142, शान्ति नगर, कुकटपल्ली, हैदराबाद-500072 फोन 040-3067338
6. इन्दौर-
भारत विकास परिषद् सेवा न्यास, 19, रूप नगर, नजदीक माणिक बाग, पुल,
इन्दौर-452007 (म.प्र.) फोन 0731-2467910
7. कोटा- भारत विकास परिषद्, पुनर्वास केन्द्र प्रताप नगर, दादाबाड़ी, कोटा (राजस्थान)
फोन 0244-2504501
8. लुधियाना- भारत विकास परिषद्, विकलांग सहायता एवं पुनर्वास केन्द्र (भारत विकास
परिषद् चैरिटेबल ट्रस्ट) सी-ब्लॉक, ऋषि नगर, नजदीक टेलीफोन एक्सचेन्ज,
लुधियाना-141001 (पंजाब) फोन 0161-2303804, 2302373, मो. 94139-90952
9. मुरादाबाद- भारत विकास परिषद्, विकलांग,सेवा न्यास, वार्ड नं.10, श्री साईं
अस्पताल, मानसरोवर कॉलोनी, दिल्ली रोड, मुरादाबाद-244001 (उ.प्र.) फोन
0591-2480719, 2480720
10. नागरोटा-
भारत विकास परिषद्, डॉ. कमल ज्योति, विकलांग पुनर्वास संस्थान, उद्योग
नगर, नगरोटा बागवां, जिला कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) फोन 01892-252329, 253520
11. पटना- भारत विकास परिषद् विकलांग न्यास, 11, रेखा मिशन, वेस्ट ऑफ जुलोजिकल सर्वे
ऑफ इण्डिया, कंकड़बाग, पटना-80008 (बिहार) फोन 0612-2360802
12. पुणे- भारत विकास परिषद् विकलांग सहायता केन्द्र, 1152, सुभाष नगर, लेन नं.1,
सुकरवर पथ, पुणे-411032 (महारास्ट्र) फोन 020-24454102
13. संचौर- भारत विकास परिषद् विकलांग सहायता एवं पुनर्वास केन्द्र, निकट बोधरा
फार्म हाउस, हडेचा रोड, संचौर-343031, जिला जालौर (राजस्थान)
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